जलसंकट सिकासेर से निस्तारी के लिए पानी छोड़ने की मांग

गरियाबंद@राजिम :- जिले अंतर्गत छुरा और फिंगेश्वर विकासखंड के अनेको गांवों में इन दिनों पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है. गावों में निस्तारी योग्य पानी का तीव्र अभाव मह्सूस किया जा रहा है. नदियाँ, झरने, पोखर, तालाब ही नहीं अनेको जगहोँ पर बनी स्टाप डैम (एनीकेट) भी सुखकर कर कूप हो गए है. जिससे अनेको गावों के ग्रामीणों के सामने निस्तारी की समस्या आन खड़ी हुई है. नहाने और कपड़े धोने तक के लिए रोज लोग मुसीबत झेलने मजबूर है.

अभी तो गर्मी की शुरुआत हुई है तब यह हाल है. जगह-जगह बोरेवेल फेल होते  जाने की सुचना प्राप्त हो रही है. निरंतर दोहन से भूजलस्तर दिनोंदिन गिरता चला जा रहा है. जिसके कारण निस्तारी की समस्या भयावह रूप लेता चला जा रहा है. आजकल त्योहारों का मौसम चल रहा है वह भी होली जैसी रंगों का. जिसका उल्लास क्या बच्चें, युवा, बुजुर्ग और महिलाओं चारों ओर खुमारी बनकर छाया हुआ है. दूसरी तरफ निस्तारी की इस समस्या ने माथे पर बल ला दिया मालूम पड़ता है. लोग चिन्तित हो रहे है कि कैसे इस समस्या से निजात पाये? और इसलिए वे जनप्रतिनिधियों के दरवाजे दस्तक देकर मिन्नते करने में लगे है कि किसी भी तरह से निस्तारी के लिए सिकासेर जलाशय से पानी छोड़ने राजी किया जाय. लेकिन अमूमन जैसा देखा गया है कि राजनीतिज्ञ मोटी चमड़ी के बने होते है. उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता की लोगो की समस्याएं कितनी बड़ी है. वे तो चुनावी गणित को ध्यान में रखकर सारे फैसले लिया करते है. और अभी तो चुनाव बहुत देर है तो वे सुनते भी बहुत देर से है. ऐसा नहीं है की उन्हें इसका भान नहीं है. मालूम तो उन्हें भी होता है आखिर जनप्रतिनिधि जो ठहरे.

छुरा और फिंगेश्वर ब्लॉक के अनेक गावों में आज निस्तारी की समस्या मुँह बाये खड़ीं है जिस तरफ शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने ग्रामीणों द्वारा अनेक जतन किया जा रहे है. जिसमे एक ओर प्रशासन के दरवाजे पर निवेदन पत्रों के साथ तो दूसरी ओर शासन के नुमाइंदे जनप्रतिनिधियों के दर मिन्नतो की एक अंतहीन श्रृखंला चल पड़ा है जिसे निष्कर्ष तक पहुचाया जाना चाहिए. चूँकि जनता जनार्दन इससे ज्यादा कुछ और कर भी तो नहीं सकते की वे अपने जनप्रतिनिधियों के मुँह ताके और उसकी स्वीकृति की प्रतीक्षा करे. इसलिए अच्छा होंगा चुनावी वर्ष नहीं होने का गफलत नहीं पालते हुए ग्रामीण जनता को राहत प्रदान करने उन्हें निस्तारी की समस्या से पार पाने सिकासेर बांध से पानी उपलब्ध कराया जावे. मौसम के जानकार इस वर्ष भीषण गर्मी की आहट का अनुमान व्यक्त कर रहे है जिससे जलसंकट और भी विकराल रूप लेने की आशंका है.

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